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स्वामित्व योजना 2026: ग्रामीण भारत में ड्रोन भूमि मैपिंग की पूरी जानकारी

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06 Jan 2026 Trishunya Team
स्वामित्व योजना 2026: ग्रामीण भारत में ड्रोन भूमि मैपिंग की पूरी जानकारी
भूमि सर्वेक्षण · सरकारी योजना

स्वामित्व योजना 2026: ग्रामीण भारत में ड्रोन भूमि मैपिंग की पूरी जानकारी

📅 06 Jan 2026 ⏱ 3 मिनट पढ़ें 🏷 Drone Survey TI Trishunya India

भारत के लाखों ग्रामीण परिवार पीढ़ियों से अपनी जमीन पर बिना किसी कानूनी दस्तावेज के रह रहे थे। उनके पास न कोई प्रॉपर्टी कार्ड था, न साफ मालिकाना हक और न ही बैंक से लोन लेने के लिए जमीन को गिरवी रखने का कोई कानूनी आधार। स्वामित्व (SVAMITVA) योजना को इसी कमी को दूर करने के लिए बनाया गया, ड्रोन की एक-एक उड़ान के साथ।

स्वामित्व (Survey of Villages and Mapping with Improvised Technology in Village Areas) केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है जो ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों का ड्रोन सर्वेक्षण करके संपत्ति मालिकों को कानूनी प्रॉपर्टी कार्ड (स्वामित्व पत्रक) प्रदान करती है। 2025 के अंत तक, लगभग 3.28 लाख गांवों में ड्रोन सर्वे पूरा हो चुका था, जो कुल लक्ष्य का लगभग 95 प्रतिशत है, और 1.8 लाख से अधिक गांवों के लिए प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए जा चुके थे।

स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण भारतीय गांव में ड्रोन भूमि सर्वेक्षण
स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन सर्वेक्षण ग्रामीण भूमिधारकों को उनका पहला कानूनी संपत्ति दस्तावेज प्रदान करता है।
3.28 लाख
गांवों में ड्रोन सर्वे पूरा
2.65 करोड़
प्रॉपर्टी कार्ड वितरित
₹1,713 करोड़
कार्ड के आधार पर बैंक लोन वितरित

स्वामित्व योजना वास्तव में क्या करती है

यह योजना गांवों के आबादी वाले (आवासीय) क्षेत्रों के ऊपर ड्रोन उड़ाकर हाई-रिज़ॉल्यूशन तस्वीरें खींचती है, जिन्हें बाद में बड़े पैमाने के सटीक नक्शों में बदला जाता है जो प्रत्येक व्यक्तिगत संपत्ति की सीमाएं दिखाते हैं। इन सीमाओं के आधार पर सीधे प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए जाते हैं, जिससे परिवारों को ऐसा कानूनी दस्तावेज मिलता है जिसे राज्य के राजस्व विभाग द्वारा स्वामित्व, बिक्री और बैंक लोन के लिए मान्यता दी जाती है, जो अक्सर उनके परिवार के इतिहास में पहली बार होता है।

ड्रोन सर्वेक्षण की प्रक्रिया कैसे काम करती है

ग्राउंड कंट्रोल पॉइंट (GCP) की स्थापना

ड्रोन इमेजरी को सटीक भूगर्भीय निर्देशांकों से जोड़ने के लिए गांव में DGPS-आधारित संदर्भ बिंदु स्थापित किए जाते हैं।

आबादी क्षेत्र पर ड्रोन उड़ान

गांव के आवासीय और संपत्ति क्षेत्रों की उच्च-रिज़ॉल्यूशन हवाई तस्वीरें खींची जाती हैं।

सीमाओं का सटीक अंकन

प्रोसेस की गई तस्वीरों का उपयोग करके व्यक्तिगत संपत्ति की सीमाएं तय की जाती हैं, जिसका सत्यापन स्थानीय ग्रामीणों की मौजूदगी में होता है।

प्रारूप संपत्ति रिकॉर्ड का सार्वजनिक प्रदर्शन

प्रारूप नक्शे सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए जाते हैं ताकि निवासी अंतिम रूप देने से पहले आपत्तियां या सुधार दर्ज करा सकें।

कानूनी प्रॉपर्टी कार्ड जारी करना

पुष्टि के बाद, राज्य सरकार कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त प्रॉपर्टी कार्ड (जैसे घरौनी या संपत्ति पत्रक) जारी करती है।

राज्यों में योजना के क्रियान्वयन की स्थिति

योजना की प्रगति विभिन्न राज्यों में अलग-अलग रही है। हरियाणा, उत्तराखंड, गोवा, त्रिपुरा, पुडुचेरी और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह जैसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्रोन सर्वे और कार्ड वितरण दोनों कार्य पूरे हो चुके हैं। जबकि तमिलनाडु, बिहार और ओडिशा जैसे बड़े राज्यों में गांवों की विशाल संख्या के कारण कार्य अभी प्रगति पर है।

स्थितिप्रमुख राज्य / केंद्र शासित प्रदेश
सर्वे और कार्ड वितरण पूर्णहरियाणा, उत्तराखंड, गोवा, त्रिपुरा, पुडुचेरी, अंडमान और निकोबार
सर्वे अधिकांशतः पूर्ण, कार्ड वितरण जारीदेश के अधिकांश प्रतिभागी राज्य
सर्वे और कार्ड दोनों में कार्य जारीतमिलनाडु, बिहार, ओडिशा (बड़े राज्यों में)

स्वामित्व योजना के तहत मिलने वाला प्रॉपर्टी कार्ड सिर्फ एक कागजी दस्तावेज नहीं है। इन कार्डों के आधार पर ग्यारह हजार से अधिक लाभार्थियों को सत्रह सौ करोड़ रुपये से अधिक के बैंक ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिससे पहले गैर-मुद्रीकृत जमीन अब एक वित्तीय परिसंपत्ति बन गई है।

ग्रामीण परिवारों के अलावा यह तकनीक क्यों महत्वपूर्ण है

स्वामित्व योजना ने राष्ट्रीय स्तर पर साबित कर दिया है कि पारंपरिक जमीन पैमाइश की तुलना में drone survey अधिक तेज, किफायती और कानूनी रूप से मान्य डेटा तैयार करता है। यही DGPS-आधारित ड्रोन तकनीक अब निजी भूमि स्वामियों और डेवलपर्स द्वारा topographic और सीमा निर्धारण कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर उपयोग की जा रही है।

ड्रोन सर्वेक्षण से बना प्रॉपर्टी कार्ड अक्सर पहला कानूनी दस्तावेज होता है जो किसी ग्रामीण परिवार को अपने ही घर के लिए प्राप्त होता है।

यदि आपके गांव में सर्वे हुआ है तो क्या जांचें

यदि आपके गांव में स्वामित्व ड्रोन सर्वे पूरा हो चुका है, तो अंतिम रूप देने से पहले प्रारूप संपत्ति नक्शा ग्राम पंचायत में प्रदर्शित किया जाता है। यह अपनी संपत्ति की सीमाओं की जांच करने और किसी भी विसंगति पर आपत्ति दर्ज करने का सबसे महत्वपूर्ण समय है, क्योंकि कार्ड जारी होने के बाद सुधार के लिए औपचारिक राजस्व संशोधन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

क्या आपको सरकारी योजना से इतर निजी ड्रोन या DGPS सर्वे की आवश्यकता है?

हमारी टीमें निजी भूमि और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए उसी सटीकता और मानकों का उपयोग करती हैं जिस पर स्वामित्व योजना आधारित है।

Frequently Asked Questions

SVAMITVA का अर्थ है Survey of Villages and Mapping with Improvised Technology in Village Areas, जो ग्रामीण आबादी भूमि के नक्शे के लिए एक केंद्रीय योजना है।

ड्रोन गांव के आबादी क्षेत्र की उच्च-रिज़ॉल्यूशन तस्वीरें लेते हैं, जिन्हें DGPS कंट्रोल पॉइंट्स से जोड़कर सटीक सीमा नक्शों में बदला जाता है।

यह ग्रामीण भूमिधारकों को जारी किया जाने वाला एक कानूनी स्वामित्व दस्तावेज है, जिसका उपयोग संपत्ति बेचने, हस्तांतरण और बैंक लोन के लिए किया जा सकता है।

2025 के अंत तक लगभग 3.28 लाख गांवों में ड्रोन सर्वे पूरा हो चुका था, जो योजना के कुल लक्ष्य का लगभग 95 प्रतिशत है।

हां, योजना के तहत जारी प्रॉपर्टी कार्ड के आधार पर बैंकों द्वारा देश भर में हजारों करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं।

हरियाणा, उत्तराखंड, गोवा, त्रिपुरा, पुडुचेरी और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में ड्रोन सर्वे और कार्ड वितरण का काम पूरा हो चुका है।

प्रारूप नक्शे के सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान तुरंत आपत्ति दर्ज कराएं, ताकि अंतिम कार्ड जारी होने से पहले सुधार किया जा सके।

नहीं, यह योजना मुख्य रूप से गांवों के आवासीय (आबादी) क्षेत्रों के लिए है, न कि कृषि भूमि के लिए जो अलग राजस्व प्रणाली के तहत आती है।

यह तकनीक DGPS ग्राउंड कंट्रोल के साथ मिलकर कुछ सेंटीमीटर की सर्वेक्षण-ग्रेड सटीकता प्रदान करती है जो कानूनी सीमांकन के लिए पूरी तरह मान्य है।

हां, स्वामित्व योजना में उपयोग की जाने वाली DGPS-ड्रोन पद्धति का उपयोग निजी भूमि मालिक और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स अपनी परियोजनाओं के लिए करते हैं।

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